देश में बढ़ रही कुपोषि बच्चे व युवा पीढ़ी जो बचाने के लिए कुछ तो करना ही होगा। आओ अपनी चिन्ता को कैसे हल करें, इसे देखते हैं---
आज देश के चाहे ग्रामीण इलाके में हो या शहरी इलाके में हो, पोषण की बहुत बड़ी समस्या है। इसके मूल में जब हम जाते हैं तो हमारा भोजन पोषक पदार्थों से परिपूर्ण नहीं होता है, जिससे शरीर को आवश्यक पोषक पदार्थ नहीं प्राप्त हो पाते हैं और हमारे शरीर का विकास ठीक से नहीं हो करके शरीर को गिरफ्तार कर देता है। कुछ लोग कहते हैं कि हम तो भरपूर भोजन करते हैं, भरपेट खाते हैं, लेकिन यह कभी विश्लेषण नहीं किया जाता है कि हमारे भोजन में पर्याप्त पोषक तत्व नहीं है। जिसके कारण हम कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। इसी क्रम में यदि हम यह जान लेते हैं कि हमारे भोजन में पोषक तत्व कौन-कौन होने चाहिए और किरण को सम्मिलित कर लेते हैं। तब हम कुपोषण से बस सकते हैं।
आज देश के चाहे ग्रामीण इलाके में हो या शहरी इलाके में हो, पोषण की बहुत बड़ी समस्या है। इसके मूल में जब हम जाते हैं तो हमारा भोजन पोषक पदार्थों से परिपूर्ण नहीं होता है, जिससे शरीर को आवश्यक पोषक पदार्थ नहीं प्राप्त हो पाते हैं और हमारे शरीर का विकास ठीक से नहीं हो करके शरीर को गिरफ्तार कर देता है। कुछ लोग कहते हैं कि हम तो भरपूर भोजन करते हैं, भरपेट खाते हैं, लेकिन यह कभी विश्लेषण नहीं किया जाता है कि हमारे भोजन में पर्याप्त पोषक तत्व नहीं है। जिसके कारण हम कुपोषण के शिकार हो जाते हैं। इसी क्रम में यदि हम यह जान लेते हैं कि हमारे भोजन में पोषक तत्व कौन-कौन होने चाहिए और किरण को सम्मिलित कर लेते हैं। तब हम कुपोषण से बस सकते हैं।
कम या ज्यादा भोजन एक लेने के या हमारे भोजन में किसी एक तत्व या विटामिन की कमी के कारण, जो लगातार बनी रहती है। कभी-कभी की अधिकता भी हो जाती है। हमारे शरीर के कुपोषण का कारण बन जाती है।जब हम उपवास करते हैं या अपने शरीर को फिट रखने के लिए डाइटिंग करते हैं। तब भी हम जानकर या अनजाने में कुपोषण के शिकार हो जाते हैं । लगातार कीटनाशक और रासायनिक खादों के प्रयोग के कारण उर्वरा शक्ति तो बढ़ जाती है। लेकिन पेड़-पौधों की पौष्टिकता में कमी होती है जिसके कारण अच्छे पोषक तत्वों का भोजन हमको नहीं प्राप्त हो पाता है।
आओ इसके लक्षण देखे---
लगातार थकान वजन में कमी और प्रतिरक्षा तंत्र की कमी या कमजोरी कुपोषण का लक्षण है। इस समय जंग फूड के कारण लगातार बच्चों में मोटापा बढ़ना है इसको भी हम कुपोषण की श्रेणी में सम्मिलित करते हैं।
कुपोषण का परिणाम---
कुपोषण शरीर को पोषक तत्व न मिलने के कारण होता है। जाहिर सी बात है कि इससे शारीरिक कमजोरी होगी। शरीर का ठीक से विकास नहीं होगा और और दुबलापन या मोटापा होकर, विभिन्न क्रियाकलापों में परेशानी आने लगती है। बार-बार रोगों का होना जैसे जुखाम-खांसी आदि। आज भी बहुत से रोग पोषक तत्वों की कमी से होते हैं। मौजूदा समय में चटपटा खाने का जंक फूड, जिस में पोषक तत्वों की बहुत ही कमी होती है, किंतु इसमें कुछ ऐसे तत्व ज्यादा होते हैं, जो शरीर में मोटापा बढ़ा देते हैं और इस मोटापे के साथ शरीर में कमजोरी और बीमारियों के बार-बार हमले का कारण यह कुपोषण ही है। जब ज्यादा स्थित बिगड़ जाती है, तो इस कुपोषण से व्यक्ति की जान भी जा सकती है।
आओ कुपोषण खत्म करें---
सही मायने में अगर हम इसका अध्ययन करें, तो यह कोई बीमारी नहीं है। भोजन के जरिए यदि पर्याप्त मात्रा में हमें खनिज और विटामिन, आज लगातार प्राप्त होते रहे, तो शरीर कभी भी कुपोषित नहीं हो सकता है। इससे पूरा विकास होगा, अच्छी लंबाई होगी और मन मस्त व हमेशा स्वस्थ रहेगा। कुपोषण को दूर करने के लिए हमें अपने आसपास किसी डाइटिशियन से यानी जो भोजन के पोषक तत्वों के बारे में विशेषज्ञों से या उससे सलाह लेकर के अपना डाइट चार्ट बनाना चाहिए और उसी के अनुसार भोजन करना चाहिए। इस तरह से हमारा शरीर को पोषित होने से बढ़ जाएगा।
देखें क्या करें, क्या न करें---
1. हमें बाजारों में बिक रहे जंक फूड से सचेत रहना चाहिए। हो सके तो
इन्हे प्रयोग में नहीं लाना चाहिए।
इन्हे प्रयोग में नहीं लाना चाहिए।
2. ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियों का और ताजे फलों का खूब सेवन करना
चाहिए।
चाहिए।
3. संजीव को हमें ज्यादा नहीं पकाना चाहिए, नहीं तो उनका पोषक तत्व
समाप्त हो जाता है और वे भोजन लायक नहीं रह जाते हैं।
समाप्त हो जाता है और वे भोजन लायक नहीं रह जाते हैं।
मसालेदार भोजन से हमें बचना चाहिए---
हमें मौसमी फलों को जरूर खाना चाहिए, क्योंकि इनमें कुछ न कुछ खास तत्व ऐसे होते हैं। जो उस मौसम के साथ-साथ हमारे शरीर को मजबूत करते हैं और हम कुपोषित नहीं रह सकते।
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